शुक्र के योग से बनने वाले राजयोग एवं कमल के फूल पर बैठी माता महालक्ष्मी ।।

शुक्र के योग से बनने वाले राजयोग एवं कमल के फूल पर बैठी माता महालक्ष्मी ।। Shukra Se Banane wala Rajyoga, Mahalakshmi And Lotus

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, महालक्ष्मी के चित्रों और प्रतिमाओं में उन्हें कमल के पुष्प पर विराजित दर्शाया गया है । इसके पीछे धार्मिक कारण तो है साथ ही कमल के पुष्प पर विराजित लक्ष्मी जीवन प्रबंधन का महत्वपूर्ण संदेश भी देती हैं । महालक्ष्मी धन की देवी हैं और धन के संबंध में कहा जाता है कि इसका नशा सबसे अधिक दुष्प्रभाव देने वाला होता है ।।

धन मोह-माया में डालने वाला और इसका नशा व्यक्ति को बुराई के रास्ते की ओर प्रेरित करता है । इसके जाल में फंसने वाले व्यक्ति का पतन होना लगभग निश्चित हो जाता है । वहीं कमल का फूल अपनी सुंदरता, निर्मलता और गुणों के लिए जाना जाता है ।।

Mata Laxmi

मित्रों, कमल कीचड़ में ही खिलता है परंतु वह उस की गंदगी से परे होता है अर्थात उस पर गंदगी हावी नहीं हो पाती । कमल पर विराजित लक्ष्मी यही संदेश देती हैं कि वे उसी व्यक्ति पर कृपा बरसाती हैं जो कीचड़ जैसे बुरे समाज में भी कमल की तरह निष्पाप रहे और खुद पर बुराइयों को हावी ना होने दें ।।

जिस व्यक्ति के पास अधिक धन हो उसे कमल के फूल की तरह अधार्मिक कृत्यों से दूर रहना चाहिए । साथ ही कमल पर स्वयं लक्ष्मी के विराजित होने के बाद भी उसे घमंड नहीं होता, वह सहज ही रहता है । इसी तरह धनवान व्यक्ति को भी सहज रहना चाहिए, जिससे उस पर लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहे ।।

मित्रों, क्योंकि निष्पाप जीवन ही हमारे सोये भाग्य को भी जगाता है । चलिए अब कुछ ज्योतिष की बात कर लेते हैं । मित्रों, आपकी कुण्डली में यदि शुक्र अश्विनी नक्षत्र में स्थित होकर लग्न में बैठा हो और उस शुक्र पर किसी भी तीन शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो ऎसा जातक उच्च श्रेणी का राजा होता है और विजय सदैव उसके साथ-साथ चलती है ।।

यदि लग्नेश बलवान होकर शुक्र के साथ द्वितीय स्थान में स्थित हो तथा द्वितीयेश, लग्नेश और शुक्र इन तीनों की शत्रु राशि या नीच राशि ना हो तो ऎसा जातक श्रेष्ठ राजा होता है । शुक्र, बृहस्पति और शनि मीन राशि में हों, चन्द्रमा पूर्ण अर्थात पूर्णिमा का हो अथवा अपनी उच्च राशि में हो…..

सूर्य को मंगल देख रहा हो और जातक का जन्म मेष लग्न में हुआ हो तो ऎसा जातक चक्रवर्ती सम्राट होता है । आज के समय में अगर ऎसे राजयोगों की बात करें तो ऐसे राजयोग वाला जातक उच्च प्रशासनिक अधिकारी, राजदूत, सेना में सेनापति अथवा उच्चाधिकारी तथा राज्य के उच्च पदस्थ व्यक्तियों को कहा जा सकता है ।।

मित्रों, यदि जन्म के समय बृहस्पति और चंद्रमा केन्द्र में हों और उनको शुक्र देख रहा हो तथा कोई ग्रह नीच राशि में न हो तो मनुष्य अतुलनिय कीर्ति वाला राजा होता है । किसी कुण्डली में शुक्र बली हो और चतुर्थ भाव से उनका किसी भी प्रकार का संबंध हो तो व्यक्ति बहुत धनवान होता है ।।

यदि चतुर्थ भाव से चन्द्रमा, बुध और शुक्र तीनों का संबंध हो और इन तीनों ग्रहों का लग्न या लग्नेश से भी संबंध हो जाए तो महाराजा योग बनता है और जातक अपार सम्पत्ति का स्वामी होता है । बलवान शुक्र लग्न से एकादश भाव या द्वादश भाव में स्थित हो तो राजयोग होता है ।।

Dampatya Jivan And Khushiyon Ka Totaka

मित्रों, शुक्र से बनने वाले अन्य योगों में लक्ष्मी योग है । लक्ष्मी योग कुण्डली में तब बनता है जब भाग्येश और शुक्र दोनों स्वराशि में या उच्चाराशि में बैठकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हो तब यह लक्ष्मी योग बनाते हैं । यह लक्ष्मी योग एक सर्वोत्तम श्रेणी का राजयोग होता है ।।

इस योग में जन्म लेने वाला जातक सुन्दर,सुशील और सुमुखी स्त्री का स्वामी होता है । यह जातक तेजस्वी, धनी, निरोगी, दूसरों को खुश रखने वाला, दानवीर, उत्तम सवारियों से युक्त एवं दूसरों की रक्षा करने वाला और एक अच्छा शासक होता है ।।

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