विवाह में बधाकारक कुण्डली के दोष एवं उसके निवारण का उपाय ।।

विवाह में बधाकारक कुण्डली के दोष एवं उसके निवारण का उपाय ।। Vivah Me Badha ke Yoga And Usaka Nivaran.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, अक्सर किसी-किसी व्यक्ति की कुंडली में ऐसे योग भी होते हैं, जिसके कारण उनकी शादी में बाधाएँ आती है । ऐसे में लाख कोशिश करने के बावजूद वे शादी की ख़ुशी से वंचित रह जाते हैं ।।

इसलिए जिस प्रकार एक चिकित्सक के लिए किसी रोगी को ठीक करने से पहले उसके मर्ज़ को पहचानना आवश्यक होता है । उसी प्रकार विवाह में हो रही देरी अथवा शादी न होने का कारण भी जानना उतना ही ज़रुरी होता है ।।

मित्रों, आइए आज शुक्रवार है, तो आज शीघ्र विवाह कैसे हो इस के उपाय पर चर्चा करते है । इससे पहले इसका ज्योतिषिय दृष्टिकोण जानते हैं । आखिर किसी व्यक्ति के शादी-विवाह में देरी क्यों होती हैः ।।

इसका पहला कारण है, मांगलिक दोष । यह दोष शीघ्र विवाह के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा कही गयी है । इसके लिये इस मांगलिक दोष का समाधान होना आवश्यक होता है ।।

यदि किसी जातक की कुंडली में मांगलिक दोष हो तो उसकी शादी में बाधा आती ही है । इसके अलावा इस दोष के रहते यदि जातक का विवाह हो जाय, तो वैवाहिक जीवन में कलह की स्थिति बनी ही रहती है ।।

इसलिए एक मांगलिक की शादी एक मांगलिक जातक से ही होनी चाहिए । इससे मांगलिक दोष का प्रभाव कम होता है । क्योंकि माइनस+माइनस= प्लस हो जाता है, इस सूत्रानुसार वैवाहिक जीवन के कलह लगभग समाप्त हो जाते हैं ।।

Vaivahik Jivan Ki Samasyaon Ka Saral Samadhan
दूसरा कारण कुंडली में सप्तमेश का बलहीन होना होता है । यदि जातक के सप्तम भाव का स्वामी दुष्ट ग्रहों से पीड़ित हो अथवा अपनी नीच राशि में स्थित हो तो वह बलहीन हो जाता है ।।

इसके अलावा सप्तमेश 6, 8 अथवा 12वें भाव में स्थित हो तो कमज़ोर हो जाता है और इसके प्रभाव से जातकों के विवाह में देरी होती है । यहाँ तक की कभ-कभी नहीं भी होता है ।।

तीसरा कारण कुंडली में बृहस्पति ग्रह का बलहीन होना । जी हाँ यदि कुंडली में बृहस्पति ग्रह दुष्ट ग्रहों से पीड़ित हो, सूर्य के प्रभाव में आकर अस्त हो अथवा अपनी नीच राशि मकर में स्थित हो तो वह बलहीन हो जाता है और इससे जातक को शादी-विवाह में दिक़्क़त का सामना करना पड़ता है ।।

चौथा कारण कुंडली में शुक्र ग्रह का नीच का होना । यदि जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह कमज़ोर होता है तो उसके जीवन में कोई भी काम पूरा नहीं हो पाता है । क्योंकि शुक्र को विवाह का कारक भी माना जाता है, इसलिए जातक को अपने विवाह में बाधाओं का सामना करना पड़ता है ।।

पांचवां कारण होता है, नवांश कुंडली में दोष । जन्म कुंडली के नौवें अंश को नवांश कुंडली कहते हैं । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस कुंडली से जातक के जीवन साथी के बारे में सटीक अनुमान लगाया जाता है ।।

इसलिए यदि किसी भी जातक की इस नवांश कुंडली में दोष हो तो उस जातक के विवाह में अनेकों बाधाएँ उत्पन्न होती हैं और विवाह में अनावश्यक विलम्ब होता है ।।

मित्रों, इस प्रकार का कोई दोष यदि आपकी कुंडली में हो और आपको वैबाहिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो तो इसका कुछ समाधान आज आपको हम बताते हैं ।।

सर्वप्रथम आप अपनी पत्रिका किसी योग्य वैदिक विद्वान् ज्योतिषी को दिखायें । और यह निश्चित करें की क्या दोष है ? अगर शुक्र या गुरु से सम्बंधित कोई दोष हो और अगर उसका प्लेसमेन्ट सही हो अर्थात अगर स्टोन धारण कर सकते हैं तो धारण करो ।।

अगर आपकी कुंडली के अनुसार शुक्र या गुरु किसी अच्छे घर का मालिक होकर किसी दुष्ट या शत्रु राशी में हों अथवा नीच के हों तो ही आप स्टोन धारण करें अथवा अन्य परिस्थितियों में सिर्फ ग्रह दोष निवारण विधि ही आपके लिये फायदेमन्द साबित हो सकती है, अन्य कोई उपाय आपके काम नहीं आएगा ।।

इसलिए अपने आप को परेशान करना बंद कीजिये और किसी वैदिक ब्राह्मण से वैदिक विधान से जिस प्रकार के ग्रहों की स्थिति हो उन सभी स्थितियों के अनुसार ग्रह दोष निवारण विधि करवायें आपको तत्काल लाभ मिलेगा ।।

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