थोडा सा गेहूं का आटा, काला धागा और एक नारियल चमकायेगा आपका व्यापार और दूर कर देगा पैसों की किल्लत ।।

धागा नारियल में लपेटते समय मानसिक रूप से सदैव शनिदेव का स्मरण करते रहें । धागे को लपेटने के बाद नारियल का यथाविधि पूजन करें । पूजन करने के बाद इस नारियल को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें । यदि आपके शहर या गाँव में नदी ना हो तो किसी भी बहते हुये जल में प्रवाहित किया जा सकता है । नारियल प्रवाहित करते समय अपने इष्ट देव और शनिदेव से बुरा प्रभाव समाप्त करने की प्रार्थना करें ।।

 

थोडा सा गेहूं का आटा, काला धागा और एक नारियल चमकायेगा आपका व्यापार और दूर कर देगा पैसों की किल्लत ।। AATA, NARIYAL AND KALA DHAGA, BADALEGA AAPKI KISMAT.

 

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

 

मित्रों, आज के जमाने में हर एक व्यक्ति अतुलनीय धन चाहता है । वो भी इतना कि पुरे परिवार के साथ फाइव स्टार होटलों में लम्बी गाड़ियों में बैठकर जाकर लंच कर पाये । लेकिन सभी के लिये ये संभव नहीं हो पाता । ऐसा अक्स़र लोग एक किसी सफल व्यापारी को ही देखते हैं जो इस प्रकार से दीखता है । इस चक्कर में बहुत से लोग अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर भी व्यापार की ओर भागते नजर आते हैं ।।

भागने वालों में कुछ ही लोग सफल हो पाते हैं, बाकि के बहुत से लोगों का तो हाल “न घर का न घाट का” वाली हो जाती है । एक सफल व्यापारी बनने के लिये सिर्फ धन और बुद्धि ही नहीं चाहिये । इन दोनों के आलावा किस्मत (भाग्य) का भी साथ होना परमावश्यक होता है । बहुत से लोग कर्मों में विश्वास करने वाले होते हैं । ठीक है, परन्तु हम भी तो कर्म ही करने और कर्मठ ही बनने को बोल रहे हैं ।।

मित्रों, कर्म की परिभाषा क्या होती है सबसे पहले तो ये जानना जरुरी है । किसी भी करता के द्वारा किसी भी कार्य को सम्पादित किया जाय उसे कर्म कहते हैं । तो क्या पूजा-पाठ करना, मन्दिर जाना, बड़े-से-बड़े अनुष्ठान को अपने कार्यों कि सफलता हेतु करवाना क्या कर्म नहीं है ? सच तो ये है, कि सबसे बड़ा पुरुषार्थ हमारे शास्त्रों के अनुसार यही है ।।

जिसे बिना समझे हम अपने झूठे अहंकार तथा अपने मूर्खतापूर्ण प्रयत्न को ही अपनी कर्मठता समझने लगते हैं । गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं, कि – यत्करोषि यद्श्नाशी यज्जुहोषि ददाषि यत् । यत्तपस्यसी कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् ।। अर्थात = जो भी खाते हो, जो भी करते हो, किसी भी प्रकार के कोई भी कर्म करते हो वो सब मुझे अर्पित करता चल, तुझे कोई दोष नहीं मिलेगा तथा हर कार्य में सफलता मिलेगी ।।

 

मित्रों, भगवान को समर्पित करना अर्थात क्या है ? क्या भगवान आपके पास आयेंगे ये कहने कि बेटा आज जो भी किया है उसे मुझे दे दे ? नहीं ! ऐसा नहीं होता ! उसके लिये आपको यज्ञ-पूजा-पाठ-धार्मिक कृत्यों के माध्यम से ही आपको जुड़ना होता है भगवान से । चलिए अब आपलोगों को कुछ काम की बातें बता दूँ, बातें तो बहुत हैं करने के लिये और बातें बाद में करेंगे ।।

अगर आपका व्यापार सीमित है, आगे बढ़ नहीं रहा है, तो आपके छोटे से व्यापार को बढ़ाने के लिये करना ये है, कि किसी भी शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री अथवा दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख देना है । परन्तु ध्यान रहे कि ऐसा करते समय आपको कोई देखे नही । रख के छोड़ दें, फिर चाहे उसे गाय खा जाय अथवा कोई भी जानवर या फिर कोई इन्सान ही उठाकर ले जाये ।।

मित्रों, यदि आप लोन, कर्ज या उधार से परेशान हैं, लगातार पैसों की किल्लत बनी रहती है । आपके तमाम प्रयत्नों के बाद भी आपके कर्ज उतर नहीं पाते ? इन कर्जों के वजह से क्या आपको मानसिक शान्ति नहीं मिलती ? हमारे वैदिक ज्योतिष में इन विषयों को बहुत गम्भीरता से लिया गया है । उसी के अनुसार आज आपलोगों को एक सटीक उपाय बताता हूँ, इस उपाय शनिवार को ही करना है ।।

ये तो अकाट्य सत्य है, कि इन्सान के सुख और दुख के पीछे उसके कुण्डली में स्थित ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थितियाँ ही कारण होती है । जन्मकुण्डली में स्थित नौ ग्रहों में यदि कोई एक ग्रह भी अशुभ फल देने वाला है तो व्यक्ति को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । सभी ग्रहों में शनिदेव को सर्वाधिक क्रूर ग्रह माना जाता है । इसका कारण है, कि शनि को न्यायाधीश का पद प्राप्त है ।।

 

मित्रों, शनिदेव ही हमारे अच्छे-बुरे का फल का निर्धारण करके हमें प्रदान करते हैं । शनि एकमात्र ऐसा ग्रह है, जो एक साथ पांच राशियों पर सीधे-सीधे प्रभाव रखते हैं । तथा एक साथ ही तीन राशियों पर साढ़ेसाती का प्रभाव भी रखते हैं और दो राशियों पर ढैय्या का प्रभाव रहता है । अत: इन परिस्थितियों में यदि कोई व्यक्ति परेशानियों का सामना कर रहा है तो उसे शनिवार के दिन ये उपाय करना चाहिये ।।

इस उपाय से आपके व्यापार में आनेवाली सभी तकलीफें दूर हो जायेंगी, आपकी किस्मत बदल जाएगी और पैसों की किल्लत सदा के लिये समाप्त हो जायेंगी । करना ये है, कि किसी भी शनिवार को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पवित्र हो जायें । इसके बाद श्रीगणेश सहित अपने सभी इष्ट देवी-देवताओं का स्मरण करें । इसके बाद आपकी जितनी लंबाई है उतना ही काला धागा नाप लें और इसे एक नारियल पर लपेट लें ।।

मित्रों, धागा नारियल में लपेटते समय मानसिक रूप से सदैव शनिदेव का स्मरण करते रहें । धागे को लपेटने के बाद नारियल का यथाविधि पूजन करें । पूजन करने के बाद इस नारियल को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें । यदि आपके शहर या गाँव में नदी ना हो तो किसी भी बहते हुये जल में प्रवाहित किया जा सकता है । नारियल प्रवाहित करते समय अपने इष्ट देव और शनिदेव से बुरा प्रभाव समाप्त करने की प्रार्थना करें ।।

 

दूसरा एक और उपाय बताता हूँ, आपको अपनी छाया का दान करना है । करना ये है, कि एक छोटी सी कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपनी परछाई को देखना है । अपनी परछाईं देखने के बाद इस तेल को शनिदेव के मन्दिर में अथवा किसी मजदूर या नाई को दान कर दें । तेल का दान कटोरी सहित करना है तथा इस उपाय के बाद अपने-आपको सभी प्रकार के अधार्मिक कृत्यों से दूर रखना है ।।

इन उपायों को करके देखें….. दुसरे जरुरतमंदों को बतायें….. और अपना फीडबैक हमें अवश्य दें….. तथा हमारे पेज को लाइक अवश्य करें – Astro Classes, Silvassa.

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