माता ब्रह्मचारिणी को यह भोग को चढ़ाने से सभी ग्रह दोष दूर हो जाते हैं ।।

माता ब्रह्मचारिणी को यह भोग को चढ़ाने से सभी ग्रह दोष दूर हो जाते हैं ।। Dusare Din Mata Brahmacharini Ko Yah Bhog Chadhane Se Sabhi Grah Dosh Dur Ho Jate Hain.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है । ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली । इससे ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तपस्या करने वाली ।।

नवरात्रि में माँ दुर्गा पूजा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है । मां ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी । इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है ।।

माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप:-

मित्रों, मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का है जो पूर्ण रूप से ज्योतिर्मय है । मां ब्रह्मचारिणी सदैव शांत और संसार से विरक्त होकर तपस्या में लीन रहती हैं ।।

Maa Brahmchaarini

कठोर तप के कारण इनके मुख पर अद्भूत तेज और एक दिब्य आभामंडल विद्यमान रहता है । मां के हाथों अक्ष माला और कमंडल होता है । मां को साक्षात ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है और ये तपस्या की प्रतिमूर्ति हैं ।।

माताजी के इस ब्रह्मचारिणी स्वरूप की उपासना करके भक्त जन सहज की सिद्धि प्राप्त कर लेते हैं । मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारद जी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी ।।

इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है । एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया ।।

कुछ दिनों तक कठिन व्रत रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे । तीन हजार वर्षों तक सूखे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं ।।

इसके बाद तो उन्होंने बिल्वपत्र खाना भी छोड़ दिया । कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं । कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया ।।

देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया । देवताओं ने सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की ।।

यह आप से ही संभव थी । आपकी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे । अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ । जल्द ही आपके पिता आपको लेने आ रहे हैं ।।

पूजा विधि: –

मित्रों, मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़े पहन लें । इसके बाद माता ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए उनका चित्र या मूर्ति पूजा के स्थान पर स्थापित करें ।।

माता ब्रह्मचारिणी की पूजा में सबसे पहले माता को स्नान, वस्त्रादि के बाद फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पित करें । उन्हें दूध, दही, घृत, मधु एवं शर्करा से स्नान कराएं और इसके देवी माता को प्रसाद चढ़ाएं ।।

प्रसाद पश्चात आचमन कराएं और फिर पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें । साथ ही दीपक जलाएं और नैवेद्य अर्पित करें । इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें अथवा इस मंत्र का यथा शक्ति अनुसार जप करें ।।

Maa Brahmchaarini

इस मंत्र का जप करें:-

दधानां करपद्याभ्यामक्षमालाकमण्डल ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा ।।

इस विधि से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मनुष्य की उम्र लंबी होती है । अगर आपकी कुंडली में बुरे ग्रह स्थित हैं तो उनकी स्थिति सुधर जाती है ।।

यहाँ तक की सभी ग्रह दोष मिट जाते हैं और अंत में मनुष्य संसार के सभी सुखों को भोगकर अन्त में स्वर्ग को प्राप्त होता है ।।

कई लोगों को ये भी नहीं पता होता कि मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए कौन सा भोग लगाया जाए । इसलिए आज हम आपको मां के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की भोग के बारे में बता रहे हैं ।।

मां ब्रह्मचारिणी का भोग:-

मित्रों, माता ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और कमल का फूल बेहद पसंद है । इसलिए इनकी पूजा के दौरान इन्हीं फूलों को देवी मां के चरणों में अर्पित करना चाहिए ।।

विशेषकर माता को शक्कर और मिश्री काफी पसंद है इसलिए मां को भोग में शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए ।।

यह भोग से माता ब्रह्मचारिणी को अत्यन्त पसन्द है, इससे माता प्रसन्न हो जाती हैं । इसलिए इन्हीं चीजों का दान भी करना चाहिए, इससे लंबी आयु का सौभाग्य भी प्राप्त होता है ।।

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