कौन सा रत्न आपको फायदा करेगा आइये जानें आपकी जन्मकुण्डली के लग्न के अनुसार ।।

मित्रों, कल हमने चर्चा किया था, की लोग कोई भी रत्न कहीं से भी लेकर पहन लेते हैं । परन्तु रत्न कोई सुन्दरता की नहीं बल्कि हमारे जीवन के लिये प्राणवान एवं उर्जा के स्रोत होते हैं । जन्मकुण्डली के माध्यम से हम ये जान सकते हैं, कि हमें कौन सा रत्न पहनना चाहिए और कौन सा रत्न नहीं पहनना चाहिए । परन्तु आज हम इस विषय में विस्तृत चर्चा करेंगे की कौन सा रत्न किस लग्न की कुण्डली वाले जातक को पहनना चाहिये ।।

जन्मकुण्डली में शुभ ग्रहों और लग्न की राशी के अनुसार ही रत्नों का चयन करना चाहिए । क्योंकि रत्न कभी-कभी फायदे की जगह नुकसान भी कर सकते हैं । किसी भी विद्वान ज्योतिषी को चाहिये की किसी भी रत्न को किसी जातक को पहनाने से पहले उसके कुण्डली का अध्ययन विधिवत करे और साथ ही उसकी दशा-महादशा आदि का भी अध्ययन अवश्य करे ।।

मित्रों, मेष लग्न की कुण्डली में लग्नेश मंगल होता है । मंगल का रत्न मूंगा होता है इसलिए इस लग्न के जातकों के लिए मूंगा सूटेबल होता है । शुक्ल पक्ष में मंगलवार के दिन और मंगल की ही होरा में मंगल के मन्त्र से जाग्रत करके सोने में अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिये । मूंगा रत्न धारण करने से रक्त के विकार दूर होते है तथा रक्त साफ़ रहता है अर्थात रक्त सम्बन्धी कोई बीमारी नहीं होती साथ ही रक्त, साहस और बल की वृद्धि भी होती है ।।

मूंगा एक ऐसा रत्न होता है जिसे धारण करने से किसी भी कन्या के शीघ्र विवाह में सहायता करता है । यह रत्न प्रेत बाधाओं से मुक्ति दिलाता है तथा बच्चों में नजर दोष जैसे विकारों को दूर करता है । वृश्चिक लग्न का स्वामी ग्रह भी मंगल ही होता है इसलिए वृश्चिक लग्न वाले जातक भी मूंगा धारण कर सकते हैं । मूंगा सरकारी नौकरी जैसे सेना अथवा सेनापति तक बनाता है ।।

मित्रों, वृष लग्न के जातकों के लिए हीरा अनुकूल रत्न होता है परन्तु इनके लिए राजयोग कारक रत्न नीलम होता है । हीरा को धारण करने के लिए शुक्ल पक्ष में शुक्र की होरा में जाग्रत करना एवं शुक्रवार को शुक्र की होरा में ही धारण करना चाहिये । हीरा धारण करने से जातक का स्वास्थ्य ठीक रहता है एवं साहस बढता है । हीरा धारण करने से बल और बुद्धि का भी जातक में विकाश होता है तथा हीरा जातक का विवाह भी जल्दी करवा देता है ।।

हीरा अग्नि, भय एवं चोरी आदि से भी बचाता है तथा हीरा पहनने से महिलाओं में गर्भाशय के रोग दूर हो जाते हैं । हीरा धारण करने से स्त्री-पुरुष दोनों का वीर्य दोष भी दूर होता है । सन्तान की इच्छुक महिलाओं को पुत्र प्राप्ति की इच्छा से हीरा धारण नहीं करना चाहिए । हाँ जिन महिलाओं को पहले से ही पुत्र सन्तान हो उनको भी अगर हिरा सूटेबल हो तो ही हीरा धारण करना चाहिए । वैसे हीरे को तुला रत्न वाले जातक भी धारण कर सकते हैं ।।

मित्रों, पन्ना रत्न मिथुन लग्न के जातकों के लिए अनुकूल रत्न माना गया है । पन्ना धारण करने के लिए बुधवार का दिन शुभ माना जाता है । बुध की होरा में बुध के मंत्र से सिद्ध करने के बाद ही पन्ना धारण करना चाहिये । पन्ना पहनने से निर्धनता खत्म हो जाती है तथा मनुष्य के मन को शान्ति मिलती है । पन्ना पहनने से विद्यार्थियों को परीक्षाओं में सफलता मिलती है ।।

पन्ना धारण करने से कफ रोगियों को रोग से निवृति अर्थात खांसी आदि अन्य गले के रोग दूर हो जाते हैं । पन्ना धारण करने से व्यक्ति का चंचल मन भी एकाग्र हो जाता है । पन्ना काम, क्रोध आदि मानसिक विकारों तक को दूर कर देता है । पन्ना धारण करने से मन को शान्ति मिलती है इसलिए कन्या लग्न वाले जातक भी पन्ना रत्न स्वर्ण में जड़वाकर धारण कर सकते हैं ।।

Janma Lagna Anusar Kaun Sa ratna Dharan Karen.
Janma Lagna Anusar Kaun Sa ratna Dharan Karen.

मित्रों, कर्क लग्न वाले जातकों के लिए मोती रत्न अनुकूल माना जाता है । मोती को चाँदी में जड़वाकर सोमवार के दिन सुबह चन्द्रमा की ही होरा में धारण करना चाहिये । धारण करने से पहले चन्द्रमा के मन्त्रों द्वारा अंगूठी को सिद्ध कर लेना चाहिये । मोती धारण करने से मनुष्य की स्मरण शक्ति बढती है । मोती धारण करने से बल, विद्या और बुद्धि का भी विकाश होता है । मोती अनिद्रा को दूर करता है तथा दांत और मूत्र के रोगों में लाभदायक होता है ।।

जिन व्यक्तियों को बहुत अधिक गुस्सा आता है उन्हें मोती अवश्य धारण करना चाहिये इससे गुस्सा कम होता है । मोती पहनने से मानसिक तनाव दूर होता है तथा अविवाहित पुरुषों का विवाह भी जल्दी हो जाता है । मोती महिलाओं को सुमंगली बनाता है इसलिए महिलाओं के लिए यह शुभ रत्न माना गया है । कर्क लग्न वाले जातकों को मूंगा रत्न बहुत लाभ देता है क्योंकि मूंगा इस लग्न वाले जातकों के लिए राजयोग कारक रत्न होता है ।।

मित्रों, सिंह लग्न की कुण्डली वाले जातकों के लिए माणिक्य रत्न अनुकूल रत्न होता है । माणिक्य को स्वर्ण में जड़वाकर रविवार को प्रातः काल सूर्य की होरा में सूर्य के मंत्र से सिद्ध करके धारण करना चाहिये । माणिक्य रत्न व्यक्ति का साहस बढ़ाता है तथा व्यक्ति के भय और दुःखों का नाश कर देता है । सूर्य सरकारी क्षेत्र से सम्बन्धित तथा पिता का कारक ग्रह है इसलिए माणिक्य धारण करने से नौकरी में तरक्की मिलती है ।।

माणिक्य रत्न व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बढ़ाता है क्योंकि सूर्य प्रतिष्ठा का भी कारक ग्रह है । माणिक्य धारण करने से अस्थियों के रोग दूर हो जाते हैं । इस रत्न के धारण करने से सिर के दर्द की समस्या से भी मुक्ति मिलती है । सिंह लग्न वाले व्यक्ति मूंगा धारण करें तो बहुत अधिक लाभ मिलता है । इसका कारण यह है की इस लग्न वाले व्यक्ति का राजयोग कारक रत्न मूंगा होता है ।।

मित्रों, जैसा की उपर मिथुन एवं कन्या इन दोनों लग्नों वाले जातकों का अनुकूल रत्न पन्ना होता है । पन्ना धारण करने की विधि तथा फल का उपर वर्णन कर दिया गया है । परन्तु कन्या लग्न के जातकों के लिए पन्ना, हीरा तथा नीलम रत्न भी शुभ होता है । तुला लग्न वाले जातकों के लिए भी वृष लग्न जैसा ही हीरा अनुकूल रत्न होता है तथा नीलम राजयोग कारक रत्न होता है । उपरोक्त विधि अनुसार सिद्ध एवं धारण करना चाहिये ।।

वृश्चिक लग्न में जन्म लेनेवाले जातकों के लिये मूंगा अनुकूल रत्न होता है । मेष लग्न की तरह फल होता है तथा सिद्धि एवं धारण की विधि भी वही है । इन जातकों को मूंगा सोने में जड़वाकर अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिये । धनु लग्न वाले पुखराज रत्न को धारण कर सकते हैं क्योंकि यह रत्न इनके लिये लाभदायक होता है ।।

मित्रों, पुखराज रत्न को स्वर्ण में जड़वाकर शुक्ल पक्ष में गुरुवार के दिन सुबह गुरु की होरा में गुरु के मंत्र से सिद्ध करके धारण करना चाहिये । पुखराज धारण करने से मनुष्य का बल एवं उसकी बुद्धी अत्यन्त तीब्र होती है । उच्च श्रेणी का ज्ञान एवं सर्वत्र मान-सम्मान की प्राप्ति होती है । पुखराज को धारण करने से पुत्र की प्राप्ति होती है तथा पुखराज व्यक्ति को बुरे कर्मों से दूर रखता है । पुखराज धारण करने से अजीर्ण प्रदर, कैंसर तथा चर्म रोग आदि ठीक हो जाते हैं ।।

मकर लग्न वाले जातकों के लिए नीलम अनुकूल रत्न होता है । नीलम को सोने में जड़वाकर शनिवार के दिन प्रातः शनि की होरा में शनि के मंत्र से सिद्ध करके धारण करना चाहिये । नीलम धारण करने से धन वैभव, सुख एवं समाज में प्रसिद्धी की प्राप्ति होती है । नीलम धारण करने से मन में सद्विचार आते हैं तथा सन्तान सुख की प्राप्ति होती है ।।

मित्रों, नीलम धारण करने से वायु रोग, गठिया एवं हर्निया आदि रोगों में भी लाभ मिलता है । नीलम धारण करने से पहले उसे अपने पास रखकर परीक्षण अवश्य कर लेना चाहिये । इतना ही नहीं बिना किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह के नीलम धारण भी नहीं करना चाहिये । कुम्भ लग्न वाले जातकों का भी अनुकूल रत्न नीलम ही होता है । इन जातकों को भी पूर्वोक्त विधि से ही नीलम धारण करना चाहिए । नीलम से धन एवं सुख प्राप्त होता है तथा प्रसिद्धी बढती है ।।

मीन लग्न वाले जातकों का भी अनुकूल रत्न पुखराज ही होता है । पुखराज को धनु लग्न की विधि के अनुसार ही सिद्ध करके गुरुवार को सुबह गुरु की होरा में धारण करना चाहिये । मिथुन, कन्या, वृश्चिक, धनु, कुंभ, मीन लग्न वाले जातक भी पुखराज धारण कर सकते हैं । परन्तु वृष, कर्क, सिंह, तुला और मकर लग्न वाले जातकों को भूलकर भी पुखराज धारण नहीं करना चाहिये ।।

मित्रों, मेष लग्न वाले जातकों को भी पुखराज धारण नहीं करना चाहिये । गुरु जन्मकुण्डली में प्रथम, पंचम एवं नवम भाव में हो तो धारण करना अच्छा होता है । जिस कन्या का विवाह न हो रहा हो उसे पुखराज अवश्य धारण करवाना चाहिये । किसी भी कन्या को पुखराज पहनाने से पहले उसकी राशी या लग्न अवश्य देखना चाहिये । अगर उसकी राशि अथवा लग्न धनु या मीन हो तो उसे पुखराज धारण करने से कोई नुकशान नहीं होगा ।।

ये बात मैंने अपने कल के लेख में भी बताया था, कि पुरुष का दायाँ हाथ एवं महिलाओं का बायां हाथ गरम होता है । इसी तरह से पुरुष का बांया हाथ तथा महिलाओं का दायाँ हाथ ठंडा होता है । इसलिए उनकी प्रकृति के अनुसार ही ठंडे या गरम रत्नों को दाहिना एवं बायाँ हाथ में धारण करना चाहिये । यदि ठंडे हाथ में ठंढे रत्न एवं गरम हाथ में गरम रत्न धारण किये जायें तो उम्मीद से अधिक लाभ मिलता है ।।

Janma Lagna Anusar Kaun Sa ratna Dharan Karen.
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मित्रों, पुखराज, हीरा, माणिक्य, मूंगा गर्म रत्न होते हैं तथा मोती, पन्ना, नीलम, गोमेद लहसुनिया ठंडे रत्न होते हैं । रत्न को धारण करने के बाद रत्न की मर्यादाओं को भी बनाकर रखना चाहिये । जैसे रत्न पहन कर अशुभ स्थान अर्थात दाह-संस्कार आदि कर्मों में नहीं जाना चाहिए । अगर ऐसे स्थान पर जाना पड़े तो रत्न उतारकर जाना चाहिए ।।

मर्यादा से अभिप्राय है उनके नियमों का पालन करना चाहिए । रत्न उतारकर घर के ही देवस्थल पर रख दें और दोबारा उपरोक्त विधि के अनुसार ही रत्न को वापस धारण करना चाहिए । वैसे मोती तथा पुखराज आदि कुछ ऐसे रत्न होते हैं जो किसी को भी लगभग सूट ही कर जाते हैं, फिर भी सलाह लेकर ही धारण करना चाहिये । परन्तु जो रत्न खंडित हो उसे कभी भी धारण नहीं करना चाहिए ।।

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