अथ श्रीबृहस्पति अष्टोत्तरशत नाम स्तोत्रम् ।।

अथ श्रीबृहस्पति अष्टोत्तरशत नाम स्तोत्रम् ।। Brihaspati Ashtottarshat Name Stotram गुरु बीज मन्त्र – ॐ ग्राँ ग्रीं ग्रौं सः गुरवे

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मृत्यु के कारण एवं चन्द्रमा की भूमिका ।।

दुसरे भाव में शनि, चतुर्थ भाव में चन्द्रमा, दशम भाव में मंगल हो तो घाव में सेप्टिक से मृत्यु होती

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फाँसी लगाकर अथवा जल में डूबकर मरने के योग ।।

स्त्री की जन्म कुण्डली में सूर्य एवं चन्द्रमा लग्न से तृतीय, षष्ठम, नवम अथवा द्वादश भाव में स्थित हो और

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नवों ग्रहों की अशुभ दशा का फल ।।

कोई भी ग्रह जब आपकी कुंडली में अशुभ हो और उस ग्रह की दशा आपके ऊपर चल रही हो तो

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नवों ग्रहों की शुभ दशा का फल ।।

मित्रों, आइए आज जानने का हम प्रयास करते हैं, की किसी जातक की कुंडली में कोई भी ग्रह यदि शुभ

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किस्मत बदलना चाहते हो तो रखें अपने पलंग के नीचे ये सामान ।।

किस्मत बदलना चाहते हो तो रखें अपने पलंग के नीचे ये सामान ।। Keep these stuff under your bed, luck

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अथ श्री नवग्रह पीडाहर स्तोत्रम् ॥

ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः । विषमस्थानसंभूतां पीडां हरतु मे रविः ॥ १॥ रोहिणीशः सुधामूर्तिः सुधागात्रः सुधाशनः । विषमस्थानसंभूतां पीडां हरतु मे विधुः

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अथ श्री नवग्रहस्तोत्रम् ।।

ज्योतिर्मण्डलमध्यगं गदहरं लोकैक-भास्वन्मणिं मेषोच्चं प्रणतिप्रियं द्विजनुतं छायपतिं वृष्टिदम् | कर्मप्रेरकमभ्रगं शनिरिपुं प्रत्यक्षदेवं रविं ब्रह्मेशान-हरिस्वरूपमनग़्हं सिंहेश-सूर्यं भजे ||१|| चन्द्रं शङ्कर-भूषणं मृगधरं

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अथ श्री नवग्रहध्यानम् ।।

।। श्रीगणेशाय नमः ।। अथ सूर्यस्य ध्यानं -(त्रिपुरासर्वस्वे) प्रत्यक्षदेवं विशदं सहस्रमरीचिभिः शोभितभूमिदेशम् | सप्ताश्वगं सद्ध्वजहस्तमाद्यं देवं भजेऽहं मिहिरं हृदब्जे ||

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अथ श्री शनैश्चर स्तोत्रम् ।।

ॐ शनैश्चरः स्वधाकारी छायाभूः सूर्यनन्दनः । मार्तण्डजो यमः सौरिः पङ्गूश्च ग्रहनायकः ॥ १॥ ब्रह्मण्योऽक्रूरधर्मज्ञो नीलवर्णोऽञ्जनद्युतिः ।। द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः

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